01 · फ़र्क
सिर्फ़ कुल रकम लिख देना खाता नहीं है
काग़ज़ की बही में हर ग्राहक के आगे अक्सर एक ही रकम लिखी रहती है — चार हज़ार बाकी। उससे यह पता नहीं चलता कि वे चार हज़ार किन सौदों के हैं, और ग्राहक ने सवाल उठाया तो हिसाब याददाश्त पर आ टिकता है। यहाँ उधार उसी बिल से बनता है जिस पर सामान गया, इसलिए बिल से आया हर रुपया किसी तारीख़ और सामान वाले बिल तक पहुँचता है।
- बकाया बिलों से बनता है, अलग से लिखना नहीं पड़ता
- हर रकम किसी तारीख़ वाले बिल तक जाती है
- एक बात दो जगह नहीं लिखी जाती, इसलिए दो हिसाब नहीं बनते
- किसी भी रकम के पीछे का बिल ग्राहक को दिखा सकते हैं