भारतीय दुकानों के लिए

दुकान चलाइए। हिसाब हम रखेंगे।

किराना, मेडिकल, हार्डवेयर, कपड़ा और थोक दुकानों के लिए बिलिंग, स्टॉक और उधार खाता — Android फ़ोन पर, इंटरनेट हो या न हो।

बिल

बिना इंटरनेट भी बनता है

उधार

हर बिल से जुड़ा हुआ

स्टॉक

बिल से अपने आप घटता है

GST

चालू या बंद, आपकी मर्ज़ी

जानने लायक

दुकान के काम की बातें।

01 · बिलिंग

बिल बनाने में दस सेकंड लगते हैं

सामान का नाम टाइप करना शुरू कीजिए या कैमरे से बारकोड स्कैन कीजिए, मात्रा डालिए, उधार का सौदा हो तो ग्राहक चुनिए, और सेव कर दीजिए। बिल उसी स्क्रीन से प्रिंट हो जाता है या WhatsApp पर चला जाता है। उसके बाद जो होना है — स्टॉक घटना, ग्राहक का बकाया बढ़ना, दिन का हिसाब बनना — वह अपने आप हो जाता है, कोई दूसरी स्क्रीन खोलनी नहीं पड़ती।

  • दो अक्षर टाइप कीजिए, सामान सामने आ जाएगा
  • किलो और ग्राम के लिए दशमलव में मात्रा
  • नकद, UPI, आधा पैसा, या पूरा उधार
  • थर्मल रसीद या A4 बिल — प्रिंट या PDF

02 · बिना इंटरनेट

नेटवर्क न हो तो भी दुकान नहीं रुकती

हर बिल पहले फ़ोन में लिखा जाता है, सर्वर पर बाद में जाता है। यही इस ऐप की बुनियाद है, कोई मजबूरी वाला इंतज़ाम नहीं। इसका मतलब यह है कि काउंटर पर खड़ा ग्राहक कभी सिग्नल का इंतज़ार नहीं करता, और तहख़ाने की दुकान भी उतनी ही तेज़ चलती है जितनी मेन रोड की। नेटवर्क आते ही रुका हुआ सारा काम अपने आप ऊपर चला जाता है।

  • बिल, स्टॉक, उधार खाता और प्रिंट — सब बिना नेट
  • बिल नंबर भी फ़ोन में ही तय होता है, सिलसिलेवार
  • अपने आप सिंक होता है, कोई बटन नहीं दबाना
  • एक बिल दो बार भेजा जाए तो भी एक ही रहेगा

03 · उधार खाता

हर रुपया किसी न किसी बिल से जुड़ा रहता है

ज़्यादातर खाता ऐप सिर्फ़ एक कुल रकम रखते हैं। उससे यह तो पता चलता है कि ग्राहक पर कितना है, पर यह नहीं कि किस सौदे का है — और बहस होने पर बात याददाश्त पर आ जाती है। यहाँ उधार बिल से बनता है, और जब ग्राहक पैसे देता है तो वह उन्हीं बिलों में लगता है जो चुकते हैं। आधा चुका हुआ बिल अपना बाकी हिस्सा दिखाता रहता है।

  • एक भुगतान कई पुराने बिलों में बाँटिए
  • हर बकाया एक तारीख़ वाले बिल तक जाता है
  • हर ग्राहक के लिए एक तय तारीख़, जिससे पहले कोई याद नहीं दिलाई जाती
  • पैसा लेने की रसीद प्रिंट या शेयर कीजिए

04 · स्टॉक

ग्राहक बताए उससे पहले पता चल जाए कि माल ख़त्म है

हर बिक्री से स्टॉक घटता है, हर ख़रीद से बढ़ता है, और हर सामान पर आप वह स्तर तय कर सकते हैं जिस पर चेतावनी चाहिए। फ़ोन दिन में एक बार बताता है कि क्या कम है — हर पैकेट बिकने पर नहीं — ताकि हफ़्ते भर बाद भी वह चेतावनी मायने रखे।

  • बिल से स्टॉक अपने आप चलता है
  • हर सामान के लिए कम-स्टॉक का स्तर
  • दिन में एक चेतावनी, हर बिक्री पर नहीं
  • ख़रीद सप्लायर के नाम से दर्ज होती है

05 · GST और स्टाफ़

GST चाहिए तो पूरा, नहीं चाहिए तो बिल्कुल नहीं

किराना और स्टेशनरी जैसी दुकानों के लिए GST शुरू में बंद रहता है और बिल पर कोई टैक्स लाइन नहीं छपती। रजिस्टर्ड हैं तो चालू कीजिए — हर सामान पर HSN कोड, मौजूदा स्लैब, और राज्य के अंदर CGST-SGST या बाहर IGST। स्टाफ़ को उनके काम के हिसाब से भूमिका दीजिए: कैशियर बिल बना सकता है पर ख़रीद का भाव या रिपोर्ट नहीं देख सकता।

  • GST बंद या चालू — दोनों पूरी तरह काम करते हैं
  • बिल नंबर लगातार, बिना नंबर छोड़े
  • मालिक, मैनेजर, कैशियर और ऑडिटर की भूमिकाएँ
  • हर बदलाव का रिकॉर्ड, जिसे कोई मिटा नहीं सकता

आम सवाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।

क्या यह बिना इंटरनेट के चलता है?

हाँ, पूरी तरह। बिल बनाना, स्टॉक देखना, उधार खाता, प्रिंट और रिपोर्ट — सब फ़ोन में रखे डेटा से चलता है। नेटवर्क आने पर सब अपने आप सिंक हो जाता है और बीच में कुछ खोता नहीं।

क्या यह मुफ़्त है?

एक मुफ़्त प्लान है जिस पर दुकान चल सकती है। पैसे वाले प्लान में स्टाफ़ के खाते, ज़्यादा सामान और ज़्यादा रिपोर्ट मिलती हैं। प्लान वेब डैशबोर्ड से बदले जा सकते हैं, और कभी भी वापस मुफ़्त प्लान पर आ सकते हैं।

क्या ऐप हिंदी में है?

अभी नहीं। यह पन्ना हिंदी में है, पर ऐप के अंदर की भाषा अभी अंग्रेज़ी है — हालाँकि शब्द दुकानदारी वाले ही हैं: bill, stock, udhaar, due, party। हिंदी पर काम चल रहा है और यही सबसे ज़्यादा माँगी गई चीज़ है। सीधे बता दिया, ताकि साइन अप करने के बाद पता न चले।

क्या कंप्यूटर चाहिए?

नहीं। Android ऐप से पूरा काम हो जाता है और ज़्यादातर दुकानें कुछ और खोलती ही नहीं। वेब डैशबोर्ड मालिक के लिए है जो बड़ी स्क्रीन पर रिपोर्ट, स्टाफ़ और स्टॉक देखना चाहे — वही डेटा, दूसरा ऐप नहीं।

क्या मेरा डेटा बाहर निकाला जा सकता है?

हाँ। सामान, ग्राहक, बिल और बकाया वेब डैशबोर्ड से CSV में निकल जाते हैं, और हर रिपोर्ट प्रिंट या PDF हो जाती है। कुछ भी बंद नहीं रखा जाता।

GST बिल बनते हैं?

हाँ। हर लाइन पर HSN कोड, मौजूदा स्लैब (0, 5, 18 और 40 प्रतिशत, साथ में सुनार के लिए 3 प्रतिशत), और बिल नंबर जो बिना इंटरनेट भी लगातार रहते हैं। वापसी के लिए क्रेडिट नोट बनता है — पुराना बिल कभी बदला नहीं जाता।

रोज़ के काम के लिए तैयार

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